Tuesday, 1 August 2017

जरूरत क्या है

तुम्हें चांद तारो की जरूरत क्या है,
इन मौसमी बहारों की जरूरत क्या है

मेरे दुश्मन निभा रहे हैं मुझसे दुश्मनी बेहतर,
फिर दगाबाज यारों की जरूरत क्या है

मेरी कलम काफी है दुनिया में इंकलाब लाने को,
मुझे मंहगे हथियारों की जरूरत क्या है

तेरी मुस्कान काफी है इसके लुट जाने को,
इस दिल को बडे बाजारों की जरूरत क्या है

इक हमराह चाहिए जो मंजिल तक साथ दे,
मुझे राहबर हजारों की जरूरत क्या है

तू चुप रहे तो तेरी खामोशी बात करती है,
फिर इन कातिल इशारों की जरूरत क्या है

Monday, 20 February 2017

मेरी दुनिया

तन्हाईयाँ बाटने के लिए यहां इंसान नहीं मिलता साहब, इसलिए हमने अपनी एक अलग दुनिया बना रखी है,  मेरी अपनी ख्वाबों की दुनिया जिसमें मैं कभी भी, कहीं से भी दाखिल हो सकता हूँ,  समझिए server से कनेक्ट होने जैसा है। मजे की बात ये है कि इसमें client भी मैं ही हूँ और server भी।
और सबसे काम की बात बताता हूँ , वहां Engineering नाम की कोई पढाई नहीं होती, और न ही strength of material जैसा कोई विषय है।
वहां पर कुछ मेरे ही जैसे लोग हैं जो बिल्कुल मेरी तरह ही दिखते हैं। मेरी तरह ही सभी के पास हजारों कहानियां हैं जो हम एक दूसरे को सुनाते रहते हैं, कोई जीत की, कोई हार की, कोई दर्द की, कोई प्यार की रोमांचक कहानियां सुनाता है। वहां कोई शख्स परेशान नहीं दिखता मुझे सभी साथ हंसते हैं साथ खेलते हैं।
वहां किसी को भूख भी नहीं लगती और न ही वहाँ गरीब और अमीर रहते हैं,  वहां सिर्फ इंसान रहते हैं।
वहां कोई किसी को तकलीफ नहीं देता सब programmed हैं मेरी दुनिया में और वहां का programmer मैं ही हूँ न,  लेकिन वहां की programming #include<stdio.h> से नहीं शुरू होती, वहाँ सारी programming मेरे विचारों से ही हो जाती है।
कितना सुकून मिलता है उस दुनिया में,मेरा बस चले तो मैं वहाँ से कभी वापस ही न आऊ,  भला कौन लौटना चाहेगा ऐसी दुनिया से जो इस बेकार, निर्दयी और संवेदनहीन दुनिया से परे हो,जिसमें हजारों रोमांचक कहानियां कैद हो और जहां आप कभी तन्हा न रहें।

सत्यम शुक्ला "सरफरोश"

Wednesday, 28 December 2016

फिक्र

सभी को अपनाने की फिक्र ने,
हमें किसी का न होने दिया

#Sarfarosh

उदासी

कैद कर दिया गया मुझे उदासियों के हवालात में, वक्त के पिटारे से मैने कुछ हंसी चुराई थी

खामोशी

मेरी बातें चुभे तो समझ आता है,
मेरी खामोशी तुम्हें क्यों तकलीफ देती है

हासिल-ए-कवायद

हासिल-ए-कवायद

Decision

I never take my own decisions, my knowledge, wisdom and will power do it for me.
#sarfarosh