हासिल-ए-कवायद
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Wednesday, 28 December 2016
एक गौरैया
एक गौरैया अब आँगन से
कम ही निकला करती है।
एक गौरैया अब कौओं की
करतूतों से डरती है।।
एक गौरैया अब मेरे
गलियारे से कतराती है।
एक गौरैया अब कौओं की
नजरो सें भय खाती है।।
एक गौरैया अब खुद को
पिंजरे में सलामत पाती है।
एक गौरैया अब अपने
घर जाने से घबराती है।।
Friday, 5 February 2016
कामयाबी
मेरी जिंदगी में एक रोज ये मकाम आएगा, मै पढूगा किताब कामयाबी की और उसमें भी मेरा नाम आएगा
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